इन कारणों से डूब जाएगी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की लड़खड़ाती नैया….
जैसे-जैसे लोकसभा चुनावों का समय नजदीक आ रहा है। सभी पार्टियां जनता के बीच अपना हित साधने की कोशिशों में लगी हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ महागठबंधन ने पूरी तरह से अपना प्लान तैयार कर लिया है मगर कांग्रेस उनके वोट बैंक में सेंध लगाने के फिराक में नजर आ रही है।
प्रियंका गांधी को दिया बनाकर कांग्रेस अंधेरे में उजाला करने का प्रयास कर रही है। मगर कुछ ऐसे कारण है जिन से कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में हार का मुंह देखना पड़ सकता है…….
प्रियंका “गांधी” जरूर हैं मगर इन्दिरा नहीं
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी जिस तरह से प्रियंका गांधी पर दांव आजमा रही है वह उसके लिए उल्टा पड़ सकता है क्योंकि प्रियंका में इंदिरा की छवि दिखाने का प्रयास किया जा रहा मगर सीधे तौर पर प्रियंका गांधी कभी भी राजनीति से जुड़ी नहीं रहीं। हालांकि उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुछ छोटे किरदार जरूर निभाए थे।
मगर उनको अचानक इतना बड़ा कार्यभार सौंपना इस बात को दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी जीत के लिए कोई भी तीर अपने तरकश में छोड़ना नहीं चाहती। कांग्रेस पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश के अनुभवी कांग्रेस नेताओं को छोड़कर कांग्रेस पार्टी की कमान प्रियंका के हाथ में सौंपकर विपक्ष के वंशवाद के दावे को मजबूत किया है। प्रियंका के पास उत्तर प्रदेश की राजनीति का कोई भी अनुभव नहीं है।

प्रियंका द्वारा खेला गया सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड
कांग्रेस की छवि कभी भी एक हिंदुत्व विचारधारा वाली पार्टी की नहीं रही। कांग्रेस ने हमेशा सेकुलरिज्म का हथियार अपना कर जनता से अपने वोट मांगे हैं। मगर अब जब कांग्रेस को सेकुलरिज्म से कोई उम्मीद मिलती नहीं दिख रही है तो गुजरात के विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी की तरह प्रियंका गांधी ने भी लोकसभा चुनाव के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड खेल दिया है।
उनकी प्रयागराज और बनारस की यात्रा में यह दिखा कि वह हिंदू वोटों को लुभाने का प्रयास कर रही हैं। अपनी प्रयागराज यात्रा के दौरान खुद को दूसरी इंदिरा के तौर पर पेश करने वाली प्रियंका गांधी ने अपने नाना फिरोज गांधी के मजार पर ना जा कर हल्के से खुद को हिंदू हितैषी दिखाने का प्रयास किया।
कांग्रेस का अचानक इस तरह से परिवर्तन जनता को अटपटा सा लग सकता है। जिस कारण इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का नुकसान हो सकता है।
महागठबंधन से अब नहीं कोई बंधन
पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए क्षेत्रीय पार्टियां महागठबंधन का रास्ता अख्तियार कर रही हैं। कांग्रेस भाजपा के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। शुरू में लगा कि सपा बसपा और कांग्रेस मिलकर उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ एक मजबूत ताकत बनकर सामने आ सकते हैं मगर महागठबंधन के पूरे होने से पहले ही कांग्रेस ने खुद को इस बंधन से अलग कर लिया।
ये कांग्रेस और महागठबंधन दोनों के लिए उन सिर में ओले पड़ने जैसा है। दोनों इस बात को जानते हैं कि कांग्रेस अकेली पार्टी के तौर पर भाजपा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी बल्कि ये महागठबंधन के लिए और भी समस्या खड़ा कर सकता है।
मुसलमान वोट का बंटवारा
भारतीय जनता पार्टी को छोड़ दिया जाए तो सपा बसपा और कांग्रेस के पास अपने मुस्लिम वोट बैंक हैं। महागठबंधन से अलगाव की स्थिति में इन मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो जाएगा जो कि कांग्रेस पार्टी और महागठबंधन की दोनों के लिए अच्छा नहीं होगा।
भारतीय जनता पार्टी कभी भी मुस्लिम वोट बैंक पर आश्रित नहीं रहती क्योंकि उसको पता है कि उसकी हिंदुत्व वाली छवि के कारण मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है।
मगर कांग्रेस की सेकुलरिज्म छवि के कारण वह अक्सर अपने मुस्लिम वोट बैंक हो बचाने का प्रयास करता है। समाजवादी पार्टी के पास आजम खान जैसे कद्दावर नेता होने के कारण उसका अपना अलग मुस्लिम वोट बैंक है जोकि उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव में बंट जाने वाला है।
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की बेतुकी बयानबाजी
सर्जिकल स्ट्राइक रही हो या फिर एयर स्ट्राइक कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेताओं ने कार्यवाही ऊपर सवाल उठाकर अपनी और पार्टी की खूब किरकिरी करवाई है और इसका सीधा खामियाजा पार्टी को चुनाव में नुकसान करके उठाना पड़ा है।
इस बार भी जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक की तो कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेताओं ने एक बार फिर से भारतीय वायु सेना से सबूत मांगे। जिस कारण पूरे देश में कांग्रेस की खूब किरकिरी हुयी और भारतीय जनता पार्टी ने इसी का फायदा उठाया। कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेताओं द्वारा इस तरह की बेतुकी बयानबाजी कांग्रेस को लोकसभी चुनावों में पीछे कर देगी।

Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

